Monday, February 16, 2009
Poems: Dr. Kumar Vishwash
कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है !मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है !!मैं तुझसे दूर कैसा हूँ , तू मुझसे दूर कैसी है !ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है !!मोहब्बत एक एहसासों की पावन सी कहानी है !कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !!यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं !जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!समंदर पीर का है अन्दर, लेकिन रो नही सकता !यह आँसू प्यार का मोती है, इसको खो नही सकता !!मेरी चाहत को दुल्हन बना लेना, मगर सुन ले !जो मेरा हो नही पाया, वो तेरा हो नही सकता !!भ्रमर कोई कुमुदनी पर मचल बैठा तो हँगामाहमारे दिल में कोई ख्वाब पला बैठा तो हँगामा,अभी तक डूब कर सुनते थे हम किस्सा मुहब्बत कामैं किस्से को हक़ीक़त में बदल बैठा तो हँगामा !!!
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